السبت، 12 أكتوبر 2019

✍ Virtues of the Qur'ān [3]



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✍ Virtues of the Qur'ān [3]
‘Uthmān ibn ‘Affān reported: The Messenger of Allāh (ﷺ) said: “The best amongst you is the one who learns the Qur'ān and teaches it.”
خَيْرُكُمْ مَنْ تَعَلَّمَ الْقُرْآنَ وَعَلَّمَهُ
📖 al-Bukhārī 5027
📚 Riyād as-Sālihīn

✍ Virtues of the Qur'aan [2]

✍ Virtues of the Qur'aan [2]
The Messenger of Allaah (ﷺ) said: “The Qur'aan and its people who applied it, will be brought on the Day of Resurrection preceded with Soorah al-Baqarah and Soorah Aali ‘Imraan arguing on behalf of those who applied them.”
يُؤْتَى يَوْمَ القِيَامَةِ بِالقُرْآنِ وَأهْلِهِ الذينَ كَانُوا يَعْمَلُونَ بِهِ في الدُّنْيَا، تَقْدُمُه سورَةُ البَقَرَةِ وَآلِ عِمْرَانَ، تُحَاجَّانِ عَنْ صَاحِبِهِمَا
📖 Muslim 805
📚 Riyaadh as-Saaliheen

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ईश्दूतत्व और मानव को उसकी आवश्यकता - हिन्दी

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ईश्दूतत्व और मानव को उसकी आवश्यकता - हिन्दी: इस ऑडियो में इस बात का उल्लेख किया गया है किस तरह मानव समाज में ईश्दूतों के अवतरण की शुरूआत हुई और विकास करते हुए एक महान संदेष्टा के ईश्दूतत्व पर संपन्न हो गयी - और वह समस्त ईश्दूतों व संदेष्टाओं के नायक मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। तथा ईश्दूतत्व के संक्षेप इतिहास का वर्णन करते हुए हमारे अंतिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व, उनके अवतरण के समय धार्मिक व सामाजिक स्थितियों, उनके गुणों, पवित चरित्र, जीवन की घटनाओं, कठिन परिस्थियों, उनकी जाति के लोगों का आपके साथ दुर्व्यवहार और आपका उनके साथ सदव्यवहार का उल्लेख किया गया है। इसी तरह पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व की सच्चाई, उसके प्रमाणों का चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि आप पर ईश्दूतत्व का समापन हो जाता है। अतएव, आप अब परलोक तक सर्वमानवजाति के लिए अल्लाह के ईश्दूत व संदेष्टा हैं और सबके लिए आपका अनुपालन करना अनिवार्य है।

: "इस्लाम और विज्ञान - हिन्दी - ज़ाकिर नायिक :/"

क़ुर्आन और नमाज़ को सझना शुरू कीजिए - हिन्दी - डाक्टर अब्दुल अज़ीज़ अब्दुर्रहीम

क़ुर्आन और नमाज़ को सझना शुरू कीजिए - हिन्दी - डाक्टर अब्दुल अज़ीज़ अब्दुर्रहीम: क़ुर्आन और नमाज़ को सझना शुरू कीजिएः क़ुर्आन और नमाज़ को समझने की शुरूआत करने के लिए एक शार्ट कोर्स, सूरतुल फातिहा, 6 सूरतें, नमाज़ के अज़कार और चंद दुआओं वग़ैरह की मदद से 100 मुख्य शब्दों को सझना और याद रखना जो क़ुर्आन में लगभग 40,000 बार आये हैं (कुल लगभग 77,800 में से), अर्थात् क़ुर्आन के 50 प्रतिशत शब्द!!! इसका उद्देश्य यह है कि क़ुर्आन को समझना आसान लगने लगे, प्रोत्साहन मिले, आगे की तालीम मज़ीद आसान हो, क़ुर्आन की आयतों में मननचिंतन का रास्ता हमवार हो।

हज्ज और उम्रा का तरीक़ा - हिन्दी - यूसुफ बिन अब्दुल्लाह अल-अहमद

हज्ज और उम्रा का तरीक़ा - हिन्दी - यूसुफ बिन अब्दुल्लाह अल-अहमद: हज्ज और उम्रा का तरीक़ाः इस पुस्तक में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सहीह सुन्नत के अनुसार हज्ज और उम्रा का तरीक़ा और उनसे संबंधित अन्य अह्काम उल्लिखित किए गए हैं, तथा साथ ही साथ कुछ हाजियों से होने वाली ग़लतियों पर चेतावनी भी कराई गई है। हज्ज के प्रत्येक दिन के कार्यक्रम को अलग-अलग बयान करते हुए उन त्रुटियों की ओर भी संकेत किया गया है जिस के अधिकांश लोग शिकार हो जाते हैं।

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